Saturday, March 21, 2009

पहला प्यार



मिली वो अनजान राहों पे,
डुबो गयी अपनी यादों में!

जाने क्या है ऐसा जादू किया,
मरू में ऊपवन का आभास दिया!

हरियाली सी है छाने लगी,
हरपल याद उसी की आने लगी!

डूब जाता हूँ उसकी ख्यालों में,
मदिरा बहती है नैनन के प्यालों में!

वो नयनें हैं या मधुशाला,
पागल है जीसने कर डाला!

नींद चुरायी, चैन चुराया,
उसके चेहरे के संवेदन से, बेचारा ये दिल घबराया!

जब जब बहती है पुरवाई,
दे जाती है हमें तन्हाई!

उसके छुवन ने है ये रोग लगायी,
शायद यही है प्यार की अगुवाई!

होली २००९


होली आती, स्मरण कराती, पिछली कितनी होली!
वो बचपन वाली टोली,कीचड़-पानी व् रंगों की रंगोली!!

इक बार दिल ने फिर ललकारा , होली खेलने जाना है!
इस होली में फिर से नये, प्यार का रंग चढाना है!!

कीचड़ का तो नाम नहीं था, रंगों का न कोई ठिकाना!
खुशियों का रंग बरसाएंगे, कुछ ऐसा था हमने ठाना!!

सबने थामी थी पिचकारी, हंसियों की बरसात हुई !
शायद उनको भी हमारे, रंग-ए-मुहब्बत की आगाज हुई !!

इस होली पे सबने सारे, बंधन को था तोड़ दिया!
शोख-आदयों से उन्होंने, इस सोये दिल को झाझ्कोड़ दिया!!

होली की रंगीन समां में, उनसे दिले की तार हुई!
दिलवालों के इस रंगोली में, दो दिलों की हार हुई!!

दो दिलों की हार हुई, दो दिलों की हार हुई....!!