Saturday, January 30, 2010

1. मरहम एक टूटे दिल का (for boys)


मदिरालय में बैठा विलाप रहा था,
मदिरा में उसको तलाश रहा था!
उसे देख अंदाज किया मैं,
वो टूटा दिल लिये लौट चला है,
ओह! प्यार भी ये कैसी बला है!

उसके जख्मों को सहलाने को,
कंद्रित मन को बहलाने को!
चुपके से उसके पास मैं आया,
व् कुछ इस तरह समझाया!

दिलवर ने जो मुख मोड़ा है,
मत सोच की दिल को तोडा है!
कुदरत की इक्षा से उसने,
ख्याबों से तुझे झझ्कोरा है!

वो चांद है तो, सूरज बन तू,
उसके चांदनी की, जरुरत बन तू!
तेरे बिन उसका अर्थ न हो,
कुदरत की ये इक्षा व्यर्थ न हो!

वो हार-मांस काया में,
कुदरत की भेजी माया में!
जबतक तेरी परछाई थी,
तबतक साथ निभाई थी!

इस जीवनपथ पे तुम बढे चलो,
निर्भीक हो अपना कर्म किये चलो!
ये काली घटा लौट जायेगी,
इक परछाई फिर से आएगी,
इक परछाई फिर से आएगी!!