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ShriRam Sir की Economics

सुबह हुई नींद से जागा, बिस्तर छोड़ Class को भागा! बरस रहे थे जहाँ Jokes & Comics, देख इसे अंदाज किया मैं, ये है शायद Shriram Sir की Economics!!  यंहा शीला अक्सर आती है, हंसियों के फव्वारे दे, हमसब की नींद भगाती है!  Indian Economics समझाने को, Monetary Policy बतलाने को! मनमोहन-तिवारी भी अक्सर, यंहा साथ-साथ दिख जाते हैं! और राज बता Zero -figure के, मुस्कान सभी पे लाते हैं!! Global-Economics के recession में, Crisis के  serious discussion में! Lehman-brothers जब आते हैं, शकीरा भी साथ में लाते हैं!! जहाँ Onion की बेदामी, Inflation का चर्चा लाता है! वहीं मुन्नी की बदनामी, सबको विचलित कर जाता है!! Economics के serious discussion में, जहाँ बरस रहे हों Jokes और Comics! बिन सोचे समझ लो प्यारे, ये हैं ShriRam Sir की Economics !!-2

वो अनजानी सूरत

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इस बेमौसम बरसात में, जहाँ पत्ता-पत्ता झूम रहा है! दहक उठा दीवाना दिल, वो अनजानी नजरें ढूंढ़ रहा है! जिनके पलकों के नीचे से, गंगा-यमुना के भांति, मदिरा की धार निकलती है! जो घूंट पिला, इक दर्शन का, इस बंजर को तृप्त कर देती है!! पंखुरियों सी गाल गुलाबी, बना देती बिन-पीये शराबी! अनछुई वो ओठ सबनमी, मिटा देती है सारी कमी!! मोरनी सी बलखाती कमर पे, जब काले बाल मंडराते हैं! पल भर में इस दीवाने दिल को, अनेकों सांप सूंघ जाते हैं!! वो कुदरत की कोई सूरत है, या सुन्दरता की मूरत है! इस बेमौसम बरसात में, उस सीरत की  जरुरत है, उस सीरत की  जरुरत है!!

दीवानगी IAS की

कल तक इस तपते सूरज को, बादल से छुपते जब देखा! बावला हुआ मन यह सोचकर, कैसी सुहानी मौसम लायी है मेघा!! याद आया जब इस मौसम में, Long-Drive पे जाता था! गाना आये या न आये, यारों के सुर में सुर लगाता था!! खिड़की के बाहर से जब-जब, ये मौसम मुझे रिझाती है! कमरे के अन्दर से UPSC, Syllabus का बोझ दिखाती है!! IAS के रूप में इस जोगन ने, ऐसी जोग लगायी है! की लगता है अब जैसे, Mathematics ही मेरी लुगाई है!! व् Paali मेरी साली है!! Paali मेरी साली है, व् G.S. ही सखा-सहेली है, कुल मिलाकर UPSC, इक बड़ी अनबुझी पहेली है!! IAS की ये कैसी, दीवानगी हमपे छायी है! जिसके लिये हमने, सारी मस्ती ठुकराई है!! ये कैसी दीवानगी हमपे छायी है! की हमने सारी मस्ती ठुकराई है!!...:)

Civil Services vs. Research

Civil Services और Research में, हो रहा है युद्ध घनघोर! बिशाल बेचारा समझ न पाये, जाना है किस ओर! Research के तरफ से जहाँ, सुख-चैन की माया है! Civil -services के शिविर में, रास्ट्रीयता व् धर्म की छाया है!! छोड़ शिविर उस मोहिनी (Research ) का, Civil -services को आया है! रास्ट्र-कल्याण के कारण हेतु, योगी का भेष अपनाया है!! सफलता की सावन बरसा, Research कौतुहल मन को भींच रही है! Easy life के सपने दिखा, बेदर्दी से, अपनी ओर खिंच रही है!! इस खिंचा-तानी के क्रम में, आया है ऐसा असमंजस का मोड़! की, बिशाल बेचारा समझ न पाये, जाना है किस ओर!! आखिर जाना है किस ओर!!

आत्म-संवाद

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चल-चला-चल, चल-चला-चल, चल बिशाल, तू चल-चला-चल!! निष्ठा को अपनी ढाल बनाकर, तत्परता से अपनी चाल रमाकर! मन रूपी अश्व को दृढ़ता से थामे, अपनी समझ के दिशा-निर्देश में! जीवन के रथ पे हो सवार, चल बिशाल, तू चल-चला-चल!! विफलताओं पे रूककर, विचार न कर, (किसी) माया का आमंत्रण, स्वीकार न कर! क्षणिक सुखों में, तुझे न रमना है, थक कर भी, कभी न थमना है! हँस-हँस के घुटक, पथ के हलाहल, चल बिशाल, तू चल-चला-चल!! सफलता की छांव, जब-कभी भी पाये, तेरे कर्म की चकरी, रुक न जाये! नित-कर्मों की लौ में, खुद को तपाकर, हर सफलता की मिसाल बना तू! दृढ-संकल्प और अथक प्रयास से, इस बिशाल को, विशाल बना तू!! चल-चला-चल, चल-चला-चल! चल बिशाल, तू चल-चला-चल!!

सीख

मास्को के airport पे, जब बिन-पाँव इक नारी को देखा! कन्द्रित हुवा मन यह सोचकर, "कैसी है ये कुदरत की लेखा"!! आँख में शूरमा, कान में बाली, दमक रही थी, उसके ओठ की लाली! सुन्दरता से परिपूर्ण वो काया, झेल रही थी, इक काली साया!! वो मजबूर सुंदरी बिन पाँव के, नित-कर्म भी स्वयं न कर पाती होगी! पल-पल की क्रिया-कर्म के लिये, दुसरे की आस लगाती होगी!! यह देख दशा मन पूछ रहा, क्या है, उसके जीवन की भाषा! ओ साकी, क्या तेरी तरह, उसकी भी होगी कोई अभिलाषा !! कुछ सीख कुदरत की इस छवि से, अपंग है, फिर भी चमक रही है! विष पी कर भी, यूँ दमक रही है!! आज तू ऐसा शपथ ले ले, न रोक सके, तुझे कोई माया! तब तक कदम बढ़ाएगा तू, जबतक सकुशल है तेरी काया!!

प्यार का मंत्र

होता सफल प्यार वही, जो इंतज़ार करे, इजहार नहीं! निःसंकोच तुम प्यार करो, पल-पल उसका दिलदार करो! पर अपने चाहत की तृष्णा में, उसकी मर्जी पे न वार करो!! उसकी भी कुछ अपेक्षाएं होंगी, सपने होंगे, चाहतें होंगी! नित-कर्मों की लाठी थामें, तुम, ऐसा कठिन उपवास करो! की उसके हर सपने में, तुम ही, केवल तुम ही वास करो!! तेरा प्यार है इक अध्सोयी ज्वालामुखी (Half Sleeping Vocano ), जो आधी जली है (from your side), आधी रुकी (of his/her side), इस अधजली (ज्वालामुखी) पे न प्रहार करो! चाहत की चिंगारी लगाकर, दिलवर के जलने का इंतज़ार करो!! जिस दिन तेरी चाहत उसे जलाएगी, ये ज्वालामुखी (of your love) स्वयं फट जाएगी! व्  निःशब्द बंधनों से जुड़े, ऐसे अटटू प्यार की शैलाव लाएगी! जिसमें कभी कोई कडवाहट, चाहकर भी, नहीं ठहर पाएगी!! अतः, होता सफल प्यार वही. जो इंतज़ार करे, इजहार नहीं!!