Tuesday, February 2, 2010

2. मरहम एक टूटे दिल का (for girls)










दरिया के किनारे, मीठे यादों के सहारे!
मतवाली पगों से, मैं चला जा रहा था!!

हवा के झोकों से, कुछ सिसकियाँ आयीं!
जिन्हें सुन मुझमें, घबराहट सी छायीं!!

उस भयावह निशा में, सिसकियों की दिशा में!
सहमा हुआ मैं, थोड़ी दूर आया!
वंहा देखकर खुदको अटपटा सा पाया!!

पत्थर के पीछे, बड़े बरगद के नीचे,
इक लड़की निरंतर रोये जा रही है!
उसकी खोयी चेतना से, व् रोने की वेदना से,
चारोतरफ जैसे, मातम छा रही है!!

उसके जीवन में कुदरत ने,
ये कैसी हालात, है लायी!
प्रिय-मिलन के मौसम में (in valentine season),
वो दिल पे खंजर,क्यूँ खायी!!

ओ जगजननी, ओ दुखहरनी,
जब तू ऐसे हारकर रोएगी!
तो ये सृष्टी, जो तेरी शक्ति है,
यक़ीनन काल के मुख में सोएगी!!

न कर शिकवा किसी से,
किसी से शिकायत न कर!
कुदरत की इस परीक्षा में,
तू अपनी शक्ति को प्रखर!!

पुत्री रूप में खुशियाँ है तू,
बहन रूप में प्रतिपालक!
बहू रूप में लक्ष्मी है,
व् पत्नी रूप में जीव्चालक!!

अपरंपार है तेरी ममता,
सारा जग इसका गुणगान करे!
फिर क्षणिक खुशियों के खातिर क्यूँ,
तू अपनी महत्ता पे वार करे!!

जीवन के इस लम्बे सफ़र में,
इक सच्चा हमसफ़र आएगा!
जो इन निर्जन आंसुओं का,
सहज गरलपान कर जाएगा!!

इक बेहतर हमसफ़र  आएगा!
इक बेहतर हमसफ़र आएगा!!