Friday, June 30, 2017

विद्यार्थी-जीवन (Specially for students in age group 15-25 years)

विद्यार्थी-जीवन, होता सबसे न्यारा !
इसके हाथों में होता है, भाग्य हमारा !!

संभावनाओं से, भरपूर यह होता !
ऊर्जा भी इसमें, प्रचुर होता !!

यह ऊर्जा हमारी, कौतुहलता बढ़ता ! (high kinetic energy)
कभी कभी हममें, हाताशी भी लाता !! (high static energy)

क्षण-भर में समझता, जग का हूँ नायक !
अगले-क्षण समझता, किसी के न लायक !!

कच्ची-समझ, कुछ समझ नहीं पाती !
ऊपर से अपनी, यौवनता सताती !!

इसी बीच सभी कहते हैं, पढ़ने को !
कलम की स्याही से, जीवन गढ़ने को !!

समझ नहीं आये, जीवन का झमेला !
इस भवँर में पाऊं मैं, खुद को अकेला !!

बिशाल भैया ने, मुझे पास बुलाया !
विद्यार्थी-जीवन की महत्ता समझाया !!

"अभी की ऊर्जा है, तेरी जिव्यशक्ति !
पढाई हीं है, तेरी मातृभक्ति !!

इस ऊर्जा को, तटीकृत कर ले तू !
मन की चंचलता, नियंत्रित कर ले तू !!

नित्-ध्यान कर, इक्षाशक्ति बढ़ाओ !
हर-रोज पढ़ने की, आदत लगाओ !!

विद्यार्थी-जीवन होता सबसे न्यारा !
इसकी मुट्ठी में होता है, जीवन हमारा !!

विद्यार्थी-जीवन होता सबसे न्यारा...."

Thursday, May 4, 2017

महायुद्ध (Mahayuddh)














जब अँधेरे में स्थिर बैठा,
अंगों का हलचल शांत हुआ !
स्वास-पथ पे चलते चलते,
पल-पल मन में होनेवाले,
तब महायुद्ध का ज्ञात हुआ !!

यहाँ धर्मयुद्ध है, व् कर्मयुद्ध भी,
मन का मन ही प्रतिद्वंदी है !
बुद्धि-विवेक और समझ हमारी,
अज्ञानता के बंदी हैं !!

लोभ-मोह और भोग-विलास,
एक खेमे में रहते हैं !
ज्ञान, त्याग और सहनशीलता,
दूसरे खेमे में बसते हैं !!

क्या करूँ, क्या नहीं करूँ,
युद्ध का संतुलन बतलाता है !
जिसको जितना बलवान किया,
स्वाभाव वही बन जाता है !!

मन ही सच्चा दोस्त बना,
और मन ही जानी-दुश्मन !
कहता बिशाल, कर ले तू साकी,
मन से मन का अर्पण !!