Wednesday, January 22, 2014

प्यार का मौसम










लो फिर से आ गया है,
प्यार का ये मौसम !
भौरों का कलियों से,
दिलदार का ये मौसम !!

समाँ धूप में सनी है,
हवा में कनकनी है !
भौरें भवंर रहे हैं,
कलियाँ सवंर रही हैं!

समय की इस घड़ी में,
जवाँ दिल धड़क रहे हैं !
दिलवर को याद करके,
अंग-अंग फड़क रहे हैं !!

दिल की धड़कनों का,
आयाम जड़ रहा है !
इन्हे व्यक्त करने खातिर,
हर शख्स होठों का,
व्यायाम कर रहा है !!

फिर से आ गया है,
प्यार का ये मौसम !
भौरों के कलियों से,
दिलदार का ये मौसम !!

दिलदार का ये मौसम,
प्यार का ये मौसम !!!!