Wednesday, November 19, 2014

सच्चा सच्च








युगों से यात्रा शुरू है तेरी,
यह जन्म भी इसका हिस्सा है!
इससे पहले जाने कितने,
जन्मों का तेरा किस्सा है !!

समय की चकरी घूम रही,
दुःख-सुख धूप और छाँव हैं !
तेरे इस सफर में साकी,
मृत्यु एक पड़ाव है !!

इस जनम का नाता-रिश्ता,
यही समाप्त हो जाएगा !
तेरी अगली यात्रा में,
साथ कोई नहीं आएगा !!

यह शरीर जिसे तू 'मैं' कहता है,
वो भी मिट्टी में मिल जाएगा !
अपने कर्मों के अनुरूप,
इक नया शरीर तू पायेगा !!

फिर कौन अपना है, कौन पराया,
इस गूढ़ रहस्य को जान लो !
माया-मोह के बंधन से उठ,
कर्म-भेद पहचान लो !!

बार-बार कहता बिशाल,
नित-ध्यान करो, और योग करो !
अपने इस मानव जीवन का,
अच्छे से उपयोग करो !!

अच्छे से उपयोग करो...
तुम अच्छे से उपयोग करो....!!

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