Wednesday, February 4, 2015

प्यार की खुमार (एक लड़के का)









इस वसंत-वहार की बेला में,
गुलों-गुलजार की मेला में !
प्यार से प्यारे, तेरे प्यारे नैना,
दे प्यार ले लिए, मेरे रैना !!

तेरे प्यार की प्यारी सौदेबाजी,
प्यारा-प्यार सिखाती है !
चुपके-चुपके बड़े प्यार से,
मुझ प्यारे को रिझाती है !!

बंद-पलकों से, शरमाकर,
मुख-मंडल पे लाली लाकर !
आगोश में जब तू आती है,
पूरकता का बोध कराती है !!

तेरी मखमली बाहों का,
आलिंगन जब-जब पाता हूँ !
भुलाकर खुद की साँसों को,
तेरी साँसों में, रम जाता हूँ !!

उन साँसों की गर्माहट,
साथ तेरे होने की आहट,
अंग-अंग फड़काता है !
स्पर्श तेरे कोमल होठों का,
पागल-दीवाना कर जाता है !!

दिल की बगिया में, ये मौसम,
प्यार का सावन लाया है !
कहता विशाल, ओ पगले तुझपे,
खुमार प्यार का छाया है !!

खुमार प्यार का छाया है....
खुमार प्यार का छाया है !!

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