सनम की याद

मद्धम सी है शाम ढल रही!
मंद-मंद पुरवाई चल रही!!
फिर याद तुम्हारी आती है!
अक्सर तन्हा कर जाती है!!
वो दिलवर तू आ जा रे!
मद्य नयन छलका जा रे!!
होठों के पान कराने को!
तेरी झुल्फों में खो जाने को!!
आतुर ये पागल दीवाना है!
प्रीत चाँद-चकोरे के भी,
जिसके चाहत के न पैमाना हैं!!
इंतज़ार है तेरे आने का!
तेरा मुझको अपनाने का!!
अब प्यासे की प्यास बढ़ा न रे!
झुल्फों को लहराकर अपने,
स्पर्श का ज्ञात करा जा रे!!
वो दिलवर तू आ जा रे!
वो दिलवर तू आ जा रे!!
nice... very romantic!!!!
ReplyDeleteReally Romantic lines man..!
ReplyDeletenice composition...hats up man
ReplyDeletewaah waah...thats a brilliant piece of poetry..
ReplyDeletebtw ye teri kaun si waali sanam ko yaad kar raha hai?..poland waali, india waali, finland waali ya phir kissi aur ko??
@Shushil
ReplyDeleteYe kavi ki kalpanik chhavi hai.. She exists everywhere..:-)
a very romantic,rich in feelings...contentful..keep it up broooo
ReplyDeletepehle "watan ki yaad" phir "sanam ki yaad".....aapne to kamaal kar diya..!!!!
ReplyDeleteObviously pahale 'Vatan' fir 'Saman'...:D
ReplyDeleteBahut sundarta se vyakta kiya hai Suhagan ki bhawanaon ko Bishal Bhaiya...bahut badhiya hai..
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